Wednesday, November 25, 2020
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सड़क यहीं रहती है

एक दिन शेखचिल्ली कुछ लड़कों के साथ, अपने कस्बे के बाहर एक पुलिया पर बैठा था | तभी एक सज्जन शहर से आए और लड़को से पूछने लगे, क्यो भाई, शेख साहब के घर को कौन-सी सड़क गई है $ शेखचिल्ली के पिता को सब शेख साहब कहते थे | उस गाँव में वैसे तो बहुत से शेख थे, परंतु शेख साहब चिल्ली के अब्बाजान ही कहलाते थे | वह व्यक्ति उन्हीं के बारे में पूछ रहा था | वह शेख साहब के घर जाना चाहता था | परन्तु उसने पूछा था कि शेख साहब के घर कौन-सा रास्ता जाता है | शेखचिल्ली को मजाक सूझा | उसने कहा, क्या आप यह पूछ रहे हैं कि शेख साहब के घर कौन सा रास्ता जाता है?

हाँ-हाँ, बिल्कुल उस व्यक्ति ने जवाब दिया | इससे पहले कि कोई लड़का बोले, शेखचिल्ली बोल पड़ा, इन तीनों में से कोई भी रास्ता नहीं जाता | तो कौन-सा रास्ता जाता है? कोई नहीं | क्या कहते हो बेटे? शेख साहब का यही गाँव है न? वह इसी गाँव में रहते हैं न? हाँ, रहते तो इसी गाँव में हैं | मैं यही तो पूछ रहा हूँ कि कौन-सा रास्ता उनके घर तक जाएगा |

साहब, घर तक तो आप जाएँगे | शेखचिल्ली ने उत्तर दिया, यह सड़क और रास्ते यहीं रहते हैं और यहीं पड़े रहेंगे | ये कहीं नहीं जाते | ये बेचारे तो चल ही नहीं सकते | इसलिए मैंने कहा था कि ये रास्ते, ये सड़के कहीं नहीं जाती | यहीं पर रहती हैं | मैं शेख साहब का बेटा चिल्ली हूँ | मैं वह रास्ता बताता हूँ, जिस पर चलकर आप घर तक पहुँच जाएँगे |

अरे बेटा चिल्ली, वह आदमी प्रसन्न होकर बोला, तू तो वाकई बड़ा समझदार और बुद्धिमान हो गया है | तू छोटा-सा था जब मैं गाँव आया था | मैने गोद मैं खिलाया है तुझे | चल बेटा, घर चल मेरे साथ | तेरे अब्बा शेख साहब मेरे लंगोटिया यार हैं | और मैं तेरे रिश्ते की बात करने आया हूँ | मेरी बेटी तेरे लायक़ है | तुम दोनों की जोड़ी अच्छी रहेगी | अब तो मैं तुम दोनों की सगाई करके ही जाऊँगा | शेखचिल्ली उस सज्जन के साथ हो लिया और अपने घर ले गया | आगे चलकर वह सज्जन शेखचिल्ली के ससुर बन गए |

चंपक बाल कहानी

प्रतापनगर एक बहुत ही संपण्र राज्य था ! वहाँ के राजा बहुत ही प्रतापी थे और प्रजा का पूरा ख़याल रखते थे ! राजा ने पूरा जीवन प्रजा की मन से सेवा की थी लेकिन अब वह बूढ़े हो चले थे तो मन में बड़ी दुविधा थी कि उनके बाद राज्य को कौन चलाएगा ?

राजा साहब के 3 बेटे थे | अब तीनों ने एक ही गुरु और एक ही विधालय से शिक्षा ली थी लेकिन राजा ये निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि कौन राज्य के लिए सबसे अच्छा उत्तराधिकारी है | अब राजा ने तीनों बेटों की परीक्षा लेने की सोची !

एक दिन राजा ने सुबह सुबह सभी पुत्रों को बुलाया और उन सबको एक एक बोरी गेहूं देते हुवे कहा कि मैं और तुम्हारी माता तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं | हमें वापस आने में एक वर्ष से भी ज्यादा लग सकता है | तुम तीनों की ये जिम्मेदारि है कि अपने हिस्से के गेहूं को संभाल के रखना और जब मैं वापस लोटूँ तो तुमको ये गेहूं की बोरी वापस लौटानी है | ऐसा कहकर राजा और रानी तीर्थ यात्रा पर चल दिए !

सबसे बड़े बेटे से सोचा ये गेहूं की बोरी पिताजी को वापस लौटनी है तो इसे मैं तिजोरी में बंद कर देता हूँ | जब पिताजी आएंगे तो वापस दे दूंगा | यही सोचकर उसने गेहूं की बोरी तिजोरी में रखवा दी ताकि एक दाना भी इधर ना हो !

दूसरे बेटे ने सोचा कि तिजोरी में तो गेहूं सड़ जायेंगे मैं इन गेहूं को खेत में डलवा देता हूँ जिससे गेहूं

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